Saturday, June 26, 2010
व्यवस्था
भारत में राज्य व्यवस्था के सञ्चालन के लिए जो अधिकारी निऊकत किये गए हैं उन पर राजनैतिक दबाव इतना ज्यादा है की वे चाहकर भी कानून का राज स्थापित नहीं कर पाते। समय की मांग है की राजनेता सिर्फ उनके कार्यों का आंकलन करें ओर ईमानदारी से उन्हें हिदायत दें जिसमे खुद का कोई स्वार्थ नहीं होना चाहिए । तभी विकास संभव है दोषी पाए जाने पर तुरंत आर्थिक दंड दिया जाना चाहिए इस देश में धन जान से ज्यादा प्यारा है।
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