Saturday, April 16, 2011
जन लोकपाल बिल
आज राजनेतिक पार्टियों में जो इस बिल के बाबत बहस और चिंता जाहिर की जा रही है वो साबित कर रही है की ये बिल इनके लिए मुसीबत बन गया है जो निगलना ओर उगलना दोनों ही मायने में उनके लिए मुसीबत है। परन्तु इस देस का युवा और बुद्धिजीवी जाग गया है की लोकतंत्र में लोक प्रमुख न की तंत्र अब तंत्र जनता चलाएगी न की तंत्र का राज जनता पर।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment